Bhopal News: कोमा से बाहर आकर पैरालिंपिक मेडल जीतने तक की यात्रा

Bhopal News | पेरिस पैरालिंपिक 2024 में मध्यप्रदेश के दो Athletes ने ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं। लेकिन, पैरालिंपिक तक पहुंचना और मेडल जीतना इन खिलाड़ियों के लिए आसान नहीं रहा। जबलपुर की रुबीना फ्रांसिस ने 10 मीटर एयर पिस्टल शूटिंग में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद ही शूटिंग छोड़ने का मन बना लिया था, क्योंकि वे टोक्यो पैरालिंपिक में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी थीं।

कठिनाइयों का सामना करते हुए रुबीना की कहानी

रुबीना ने अपने खेल की यात्रा की शुरुआत साल 2015 में की। 10वीं क्लास में रहते हुए, उन्होंने स्कूल में आयोजित Talent Hunt Competition में हिस्सा लिया था। गगन नारंग की Academy द्वारा आयोजित इस Competition की रजिस्ट्रेशन फीस 100 रुपए थी। पापा से अनुमति मिल जाने के बाद, उन्होंने पहली बार पिस्टल हाथ में ली और 5 में से 4 राउंड शूट किए।

Talent Hunt समाप्त होने के बाद, रुबीना ने Academy से संपर्क किया और उनकी Registration की स्थिति पूछी। इसके बाद से ही उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

ट्रेनिंग की चुनौतियाँ और समाधान

शुरुआत में, रुबीना Chair पर बैठकर शूटिंग करती थीं जिससे उन्हें कमर में दर्द होता था। Para Athlete के तौर पर खेल की तकनीक को सही करने का तरीका समझने में उन्हें दिक्कत आई। भोपाल शूटिंग Academy ने उन्हें Special Shoes पहनने की सलाह दी, लेकिन पैरों की Movement में सुधार नहीं हुआ। जसपाल राणा सर ने उन्हें मुंबई जाकर Special Soles बनवाने के लिए कहा, जिससे उनके पैर की Movement सामान्य हो गई।

ओलिंपिक की ओर पहला कदम

शूटिंग शुरू करने के बाद, ओलिंपिक के बारे में रुबीना की जानकारी कम थी। चार साल के शूटिंग अनुभव के बाद, पेरू लीमा में Para World Cup में Gold जीतने के साथ ही उन्होंने टोक्यो ओलिंपिक का टिकट भी प्राप्त किया। इस सफलता ने उनके दृष्टिकोण और ट्रेनिंग में बड़ा बदलाव किया।

टोक्यो का अनुभव और डिप्रेशन से उबरना

टोक्यो ओलिंपिक के लिए कम तैयारी का समय मिलने की वजह से रुबीना की सातवीं Rank आई। इस हार ने उन्हें गहरे Depression में डाल दिया और उन्होंने शूटिंग छोड़ने का मन बना लिया था। अपने कमरे से बाहर नहीं निकलने और पढ़ाई की ओर लौटने की सोच के बावजूद, मम्मी-पापा ने उन्हें हौसला दिया और कोच सुभाष सर के माध्यम से वह Depression से बाहर आईं। देहरादून जाकर Meditation और Yoga Classes अटेंड की, जिससे उनका आत्मविश्वास लौट आया।

आत्म-मोटिवेशन के तरीके

रुबीना अब खुद को Motivate करने के लिए Discipline, Self-Control और Patience को अपनी सफलता का मुख्य कारण मानती हैं। इन गुणों के बिना, खेल के दौरान एक खराब शॉट पूरे गेम को प्रभावित कर सकता है। Over-Excitement से बचना और हर स्थिति में खुद को Control करना जरूरी है।

भविष्य की योजनाएँ

रुबीना का लक्ष्य अब Gold जीतकर ओलिंपिक में Double Medalist बनना है। वह चाहती हैं कि उनके जैसे बच्चे खेलों में आएं और उनके लिए अपनी Sports Kit, Shoes, Lens डोनेट करें।


कपिल का जूडो और उसके बाद का सफर

जूडो खेल की शुरुआत

कपिल परमार ने जूडो खेलना तब शुरू किया जब 2009 में एक हादसे के बाद वह Coma में चले गए थे। उन्होंने तीन साल तक Recovery की और जूडो को अपनी नई दिशा के रूप में चुना, क्योंकि लोग Disabled Athletes के लिए जूडो में संभावनाएं देख रहे थे।

हादसा और उसकी गंभीरता

2009 में, खेत में पानी की मोटर बंद करते समय कपिल को बिजली का जोरदार झटका लगा, जिससे वह लगभग Blind हो गए। उनकी Eyesight 80% से अधिक प्रभावित हुई और कई Doctors ने उनके ऑपरेशन की असंभवता की पुष्टि की।

कोमा से बाहर आने की कहानी

कपिल के अनुसार, उनकी Mother की वजह से ही वह आज जो कुछ हैं, वही हो पाए हैं। Mother ने दो साल तक उन्हें Tube से खाना खिलाया और Coma में रहते हुए उनका पूरा ध्यान रखा। Father ने हार मान ली थी, लेकिन Mother ने कभी हार नहीं मानी।

परिवार की भूमिका और प्रतिक्रिया

परिवार कपिल की ताकत है। उनकी मेहनत और संघर्ष ने उन्हें आज की स्थिति में पहुंचाया। 2019 में Commonwealth में पहला Medal जीतने के बाद, उन्होंने टैक्सी चलाना बंद कर दिया और आज भी उनकी Tea और Mawa Bati की दुकान है जो उनकी पहचान है।

नॉर्मल Player से ट्रेनिंग कितनी अलग है?

कपिल ब्लाइंड Players के साथ ट्रेनिंग नहीं करते। वे अपनी सारी Practice Normal Players के साथ करते हैं। वे उन्हें हरा नहीं पाते और 60 किलो Category में World Number One हैं। उनके 2700 Points हैं, जबकि दूसरे नंबर पर वाले के 1400 Points हैं।

भविष्य की योजनाएँ

अब Medal जीतने के बाद सबका Mindset बदल गया है। लोग कहते हैं कि उन्हें कपिल जैसा बनना है। वह Blind School में Lecture देने जाते हैं और ऐसे बच्चों के लिए बहुत कुछ करना चाहते हैं।


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पेरिस पैरालिंपिक- भारत ने पहली बार 29 मेडल जीते

पेरिस पैरालिंपिक 2024 में भारत ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 7 Gold समेत 29 Medals जीतकर सफर समाप्त किया। 10वें दिन शनिवार, 7 सितंबर को देश को 3 Medals मिले। Games की Closing Ceremony आज रात 11:30 बजे से होगी। भारत Medal Tally में 18वें नंबर पर रहा। देश ने 7 Gold, 9 Silver और 13 Bronze Medals जीते। यह भारत का All-Time Best प्रदर्शन है, इससे पहले टोक्यो में देश ने 5 Gold समेत 19 Medals जीते थे।

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