Bhopal News | Mukesh Bhaskar, जो पिछले दस साल से सरकारी स्कूल में Guest Teacher के तौर पर पढ़ा रहे हैं, ने बताया कि वह सुबह साढ़े दस बजे से साढ़े पांच बजे तक स्कूल में रहते हैं और इसके बाद मजदूरी पर निकल जाते हैं। उनका कहना है, “Guest Teacher को मिलने वाली Salary से परिवार का भरण-पोषण करना बहुत कठिन है। हमारी Job की कोई स्थिरता नहीं है। आज है तो कल नहीं है।”
Khargone जिले के निवासी Bhaskar हाल ही में 10 सितंबर को राजधानी Bhopal में हुए Guest Teacher आंदोलन में शामिल होने आए थे। वे बताते हैं कि Guest Teacher कई साल से नियमित किए जाने की मांग कर रहे हैं और CM House घेरने की कोशिश की थी।
स्कूल के साथ मजदूरी का संघर्ष
Bhaskar का कहना है कि उन्हें स्कूल में पढ़ाने के अलावा अन्य काम करना पड़ता है क्योंकि उनकी Salary काफी कम है। घर में पत्नी, तीन बच्चे और मां हैं, जिनकी जिम्मेदारी उनके ऊपर है। वह खेतों में दवाई छिड़कने से लेकर मजदूरी तक का काम करते हैं और कहते हैं, “जब पढ़ाते हैं, तो Teacher हूं, और जब मजदूरी करते हैं, तो Labor हूं।”
Tulsiram का संघर्ष
Tulsiram, जो Khargone जिले के भगवानपुरा Block में Guest Teacher के तौर पर कार्यरत हैं, ने बताया कि वे 6वीं से 8वीं कक्षा के बच्चों को पढ़ाते हैं और शाम को अन्य काम करते हैं। उनका कहना है, “खेतों में कपास बीनने और दवाई छिड़कने के अलावा मकान निर्माण का काम भी करता हूं।”
उन्होंने यह भी कहा कि मानदेय इतना कम है कि घर खर्च भी मुश्किल से चल पाता है। वह बताते हैं कि उनके अनुसार लोगों की प्रतिक्रिया होती है कि मानदेय में घर खर्च नहीं चलता, और इस कारण उन्हें अतिरिक्त काम करना पड़ता है।
Sanjay Singh का अनुभव
Sanjay Singh, जो Class-1 के Teacher हैं, ने कहा कि Shivraj सरकार ने उनके मानदेय को 9 हजार से बढ़ाकर 18 हजार रुपए कर दिया था। वह बताते हैं, “9 साल से बच्चों को पढ़ा रहा हूं, लेकिन आज भी इस बात का भरोसा नहीं है कि कल मेरा क्या होगा।”
सरकार Regular Teachers की भर्ती कर रही है। जिस दिन मेरी स्कूल में भी Regular Teacher की भर्ती हो जाएगी तो बाहर हो जाएंगे। मेरे कई साथी बाहर हो चुके हैं। उनसे पूछा- परिवार में कौन है तो बोले- माता-पिता, भाई-भाभी, तीन बच्चे हैं। बड़ा बेटा KG 1 में पढ़ता है।
Suresh Karma का अनुभव
Suresh Karma, जो Class 2 के Teacher हैं, कक्षा 6वीं से 8वीं तक के बच्चों को पढ़ाते हैं। कहते हैं कि अप्रैल के बाद हमें बाहर कर दिया जाता है। उसके बाद जुलाई या अगस्त में नए सिरे से Joining होती है।
पिछले 8 साल से Guest Teacher के तौर पर पढ़ा रहा हूं। दूसरा काम भी करता हूं। अब Soybean की फसल आएगी तो खेतों में फसल कटाई का काम करूंगा। जब Wheat की फसल आएगी तो गेहूं कटाई का काम करता हूं।
जब खेती बाड़ी से जुड़ा काम नहीं मिलता तो Brick Kiln लगाने का काम करता हूं। सरकार ने तो पिछले साल सितंबर में मानदेय बढ़ाया है। उससे पहले तो जो मानदेय मिलता था, उसमें घर खर्च ही मुश्किल से चलता था।
Mukesh Gehlot की कहानी
Jhabua जिले के रहने वाले Mukesh Gehlot Class 1 के Teacher हैं। तीसरी और चौथी कक्षा के बच्चों को पढ़ाते हैं। Mukesh कहते हैं, “मुझे पढ़ाते हुए 5 साल हो चुके हैं। गर्मी की छुट्टियों में जब स्कूल बंद होते हैं तो Rajasthan के Kota और Gujarat के Vadodara समेत बाकी राज्यों में मजदूरी के लिए चला जाता हूं।”
वहां क्या करते हैं? यह पूछने पर बोले कि Labor से लेकर Construction Site पर जो भी काम होते हैं, वो करते हैं। अब घर चलाने के लिए कुछ तो करना ही पड़ेगा।
भगवान दास की कहानी
ऐसी ही कहानी Shadol के भगवान दास की भी है। वे भी Class-1 के Teacher हैं। कहते हैं कि 2016 में जब मैंने Guest Teacher के तौर पर पढ़ाना शुरू किया तो 2500 रुपए मानदेय मिलता था। 2018 में 5 हजार रुपए मिलने लगे, उसमें भी पैसे कट जाते थे।
पिछले साल से 10 हजार रुपए मानदेय मिलना शुरू हुआ है, लेकिन गर्मी की छुट्टियों में मानदेय नहीं मिलता और न ही पढ़ाने का मौका मिलता है। ऐसे में कभी Grocery की दुकान तो कभी Clothes की दुकान पर काम कर लेते हैं। वे कहते हैं कि मेरे घर से ही स्कूल करीब 35 किमी दूर है। Salary का आधा पैसा तो आने-जाने में ही खर्च हो जाता है।
मनोहर बोरयाला की कहानी
16 साल बच्चों को पढ़ाया, अब पुताई करते हैं। Manohar Boryala Khargone जिले के रहने वाले हैं। 2008 से बतौर Guest Teacher उन्होंने Khargone जिले के अलग-अलग स्कूलों में पढ़ाया। 2024 में उन्हें Guest Teachers के पैनल से बाहर कर दिया गया।
Manohar कहते हैं, “जब मैंने पढ़ाना शुरू किया था, तब 150 रुपए मानदेय मिलता था। अब मैं बेरोजगार हूं क्योंकि सरकार ने Permanent Teacher की भर्ती कर ली है।”
एक बेटी है, जो आठवीं में है। बेटा पांचवीं में पढ़ता है। घर में मां भी है। ऐसे में अब खेतों में मजदूरी करने के साथ-साथ Painting और Construction का काम करता हूं। 200 रुपए दिहाड़ी मजदूरी मिलती है, उसी से घर खर्च चल रहा है। लोग मजाक उड़ाते हैं मगर मेरे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
तबस्सुम बानो की कहानी
Tabassum Bano Bhopal की Housing Board Colony में अपनी मां और 6 साल की बेटी के साथ रहती हैं। पति का इंतकाल हो चुका है। वे कहती हैं कि 2011 से Guest Teacher के तौर पर Barakheda के सरकारी स्कूल से पढ़ाने की शुरुआत की थी।
मेरा Accident हो गया तो फिर Kohefiza के स्कूल में Join किया। उस वक्त 1500 रुपए मानदेय मिलता था। 2023 में आखिरी बार Gandhi Nagar के Higher Secondary School में पढ़ाया। जैसे ही 2023 का Session खत्म हुआ, मुझे कहा गया कि अब इस स्कूल में Permanent Teacher Join करेंगे इसलिए आपको Free किया जाता है।
अगले सत्र में आपको बुलाएंगे, तब से लेकर अब तक मुझे कोई Call नहीं आया। इस बार भी जब Guest Teachers के लिए Counseling और Choice Filling हुई तो मैंने Apply किया। जब मैं पढ़ाती थी तो हमें सालाना 25 अंक Bonus के तौर पर मिले थे लेकिन अब वो भी हटा दिए हैं।
Tabassum कहती हैं, “तीन साल पहले Guest Teachers के कार्यक्रम में पूर्व CM Shivraj Singh Chauhan आए थे। मेरी बच्ची वहां खेल रही थी। उनकी नजर उस पर पड़ी तो उन्होंने उससे पूछा- पापा क्या करते हैं तो बच्ची ने कहा था कि पापा नहीं हैं। तब उन्होंने कहा था- बेटा तेरा मामा जिंदा है। कोई भी समस्या हो तो मुझे बताना।”
मैं समस्या बताने गई थी लेकिन मुझे किसी ने मिलने नहीं दिया। न तो Regular हुए और न ही विभागीय परीक्षा का वादा पूरा हुआ।
ये खबरें भी पढ़ें…
8 हजार अतिथि शिक्षकों का 6 घंटे प्रदर्शन
भोपाल में नियमितिकरण समेत 5 मांगों को लेकर 8 हजार से ज्यादा Guest Teachers ने प्रदर्शन किया। बारिश के बीच भी वे डटे रहे। प्रदर्शन 6 घंटे तक चला। Guest Teachers का एक प्रतिनिधिमंडल Education Minister Rao Uday Pratap से मिलने पहुंचा था। लेकिन बात नहीं बनी। अब Minister बुधवार सुबह 11 बजे प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करेंगे। पूरी खबर पढ़ें…
आंदोलन में शामिल होने गए थे अतिथि शिक्षक, 6 माह के बेटे की हुई मौत
Suresh Karma Guest Teacher हैं। वे मंगलवार को Guest Teachers के आंदोलन में शामिल होने Bhopal गए थे। इसी बीच 6 माह के जुड़वा बेटों में से एक Ram की तबीयत खराब हो गई। घर में कोई पुरुष नहीं था। अन्य परिजन Ram को Kannod Hospital ले गए। जहां इलाज शुरू होने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया।
